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“घोषणाओं में हरियाली, ज़मीन पर संघर्ष: 15,000 पेड़ों से एड. जमील देशपांडे ने लिखी हरित क्रांति की कहानी”….

ग्लोबल न्यूज़ 24 लाइव | विशेष रिपोर्ट l

देश में एक तरफ भीषण गर्मी का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि दुनिया के सबसे गर्म शहरों में भारत के शहरों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक बताई जा रही है। इसी बीच सरकार द्वारा 33 करोड़ पेड़ लगाने जैसी बड़ी-बड़ी घोषणाएं भी सामने आती हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या ये पेड़ वास्तव में ज़मीन पर मौजूद हैं, या सिर्फ कागजों और रिपोर्टों तक ही सीमित रह गए हैं? जमीनी हकीकत अक्सर इन दावों से बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करती है, जहां कई जगह पौधे लगाने के बाद उनकी देखभाल का कोई ठोस इंतजाम नजर नहीं आता।

इसी सच्चाई के बीच महाराष्ट्र में मराठी प्रतिष्ठान के अध्यक्ष ॲड.जमील देशपांडे ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो न सिर्फ सिस्टम पर सवाल उठाती है बल्कि समाज को रास्ता भी दिखाती है। पिछले 3 वर्षों में उन्होंने अपने प्रयासों से करीब 15,000 पेड़ लगाए हैं — और खास बात यह है कि यह सिर्फ पौधारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनकी निरंतर देखरेख और संरक्षण भी सुनिश्चित किया गया है।

देशपांडे द्वारा लगाए गए पेड़ों में नीम, जामुन, आम सहित कई उपयोगी और ऑक्सीजन देने वाले वृक्ष शामिल हैं। यह एक योजनाबद्ध हरित क्षेत्र के रूप में विकसित हो रहा है, जहां हर पौधे को रोज़ाना पानी दिया जाता है और उसकी देखभाल की जाती है। आज इन पेड़ों में से कई 15 से 20 फीट तक ऊंचे हो चुके हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि सही देखभाल और नीयत से लगाया गया पौधा एक मजबूत पेड़ बन सकता है।

इस हरित पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यहां परिंदों के लिए विशेष घर (बर्ड हाउस) बनाए गए हैं, साथ ही उनके लिए दाना और पानी की भी नियमित व्यवस्था की जाती है। यह न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का कार्य है, बल्कि जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय कदम भी है।

जहां एक ओर सरकारी योजनाओं और आंकड़ों पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं एड. जमील देशपांडे का यह प्रयास इस बात को साबित करता है कि अगर ईमानदारी और निरंतरता हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह पहल उन सभी के लिए एक प्रेरणा है जो पर्यावरण संरक्षण की बात तो करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कदम उठाने से पीछे हट जाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार बढ़ती गर्मी और हीट वेव (लू) का सीधा संबंध पेड़ों की कमी से है। पेड़ न सिर्फ तापमान को नियंत्रित करते हैं, बल्कि वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाने, प्रदूषण को कम करने और बारिश के चक्र को संतुलित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अगर समय रहते बड़े स्तर पर प्रभावी और वास्तविक वृक्षारोपण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

आज जरूरत इस बात की है कि केवल घोषणाओं और आंकड़ों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर निगरानी, संरक्षण और जनभागीदारी को प्राथमिकता दी जाए। एड. जमील देशपांडे की यह पहल एक मजबूत संदेश देती है —
“पेड़ लगाना शुरुआत है, लेकिन उन्हें बचाना ही असली जिम्मेदारी है।

जब देश गर्मी की मार झेल रहा है, तब ऐसे प्रयास उम्मीद की ठंडी छांव बनकर सामने आते हैं। सवाल अभी भी कायम है —
क्या सिस्टम अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, या फिर बदलाव की कहानी ऐसे ही कुछ लोगों के भरोसे लिखी जाएगी?

✍️ रिपोर्ट: ग्लोबल न्यूज़ 24 लाइव